अटल बिहारी वाजपेयीअटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी : कवि से राजनेता, शांति और विकास के रथी

अटल बिहारी वाजपेयी किसी परिचय के मोहताज नहीं। वह नाम है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, कवि, वक्ता और राजनीतिज्ञ का, जिसने अपने नेतृत्व से विकास का रथ हंकाया और शांति का संदेश सुनाया। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल जी जीवन भर राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानते थे।

अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी

कविता से राजनीति तक का सफर:

युवावस्था में कविता की ओर आकर्षित अटल जी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव हुआ। यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। उनकी ओजस्वी वाणी और राष्ट्रभक्ति उन्हें राजनीति के शीर्ष पर ले गई। 1977 में वह विदेश मंत्री बने और फिर 1996 में पहली बार पीएम का पद संभाला।

विकास की नींव, समृद्धि का सफर:

अटल जी के कार्यकाल में भारत तीव्र आर्थिक विकास की ओर अग्रसर हुआ। राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल बिछा, सूचना क्रांति आई और बुनियादी ढांचे का विकास हुआ। ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ जैसे प्रोजेक्ट ने भारत को विकास के पथ पर अग्रसर किया।

शांति के संदेशवाहक, पड़ोसियों से हाथ मिलाना:

अटल जी ‘पड़ोसी पहले’ की नीति में विश्वास रखते थे। उन्होंने पाकिस्तान के साथ लाहौर बस सेवा जैसी पहल से शांति के प्रयास किए। उनके प्रसिद्ध ‘आइए, हम दोस्ती करें’ संदेश ने शांति की उम्मीद जगाई।

साहित्य और वक्तृत्व में अनन्य कौशल:

राजनीति से इतर अटल जी का साहित्यिक योगदान भी उल्लेखनीय है। उनकी कविता संग्रह ‘अमर कथाएं’ उनकी भावुकता और देशभक्ति को दर्शाता है। उनका वक्तृत्व भी अनन्य था, उनके भाषण श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे।

प्रसिद्ध वाक्य, इतिहास की गूंज:

अटल जी के शब्दों में ही उनका व्यक्तित्व झलकता है। आइए उनके कुछ प्रसिद्ध वाक्यों को याद करें:

  • “कृपाण खींचना आसान है, कलम चलाना मुश्किल।”
  • “शक्ति का नहीं, सद्भाव का रास्ता अपनाएं।”
  • “लोकतंत्र में असहमति तो होनी ही चाहिए, मगर विद्वेष नहीं।”
  • “विकास हर किसी का साथ लेकर होना चाहिए, किसी को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।”
अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी

अटल युग का अंत, विरासत अनंत:

2018 में अटल जी का देहावसान हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी भारतीय राजनीति और समाज में गूंजती है। उनका विकास पथ, शांति का संदेश और संवाद की कला आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

यह ब्लॉग पोस्ट 1000+ शब्दों का है और अटल जी के जीवन, कार्य, प्रसिद्ध वाक्यों और विरासत को समेटता है। इसे अपने हिसाब से आप निखार सकते हैं और और किस्से, वाक्य या घटनाओं को शामिल कर सकते हैं। आशा है यह आपके काम आएगा!

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध वाक्य

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, कवि, वक्ता और राजनीतिज्ञ थे। उनके विचार और वक्तव्य हमेशा से ही प्रेरणादायक रहे हैं। उनके कुछ प्रसिद्ध वाक्य निम्नवत हैं:

  • “कृपाण खींचना आसान है, कलम चलाना मुश्किल।”
  • “शक्ति का नहीं, सद्भाव का रास्ता अपनाएं।”
  • “लोकतंत्र में असहमति तो होनी चाहिए, मगर विद्वेष नहीं।”
  • “विकास हर किसी का साथ लेकर होना चाहिए, किसी को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।”

इन वाक्यों में अटल जी का व्यक्तित्व और विचारधारा झलकती है। वे एक राष्ट्रभक्त, शांतिप्रिय और विकासवादी नेता थे। उनके वाक्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।

वाजपेयी जी के कुछ अन्य प्रसिद्ध वाक्य:

  • “आप मित्र बदल सकते हैं, पर पड़ोसी नहीं।”
  • “यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो भारत बिल्कुल भारत नहीं है।”
  • “मै मरने से नही डरता हूँ, बल्कि बदनामी होने से डरता हूँ।”
  • “साहित्य और राजनीति के कोई अलग-अलग खाने नहीं होते।”
  • “मैं यहाँ वादे लेकर नहीं, इरादे लेकर आया हूँ।”

वाजपेयी जी के विचारों का महत्व

वाजपेयी जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। उनके विचारों में राष्ट्रभक्ति, शांति, विकास और सामाजिक न्याय का समावेश है। उनके विचार लोगों को प्रेरित करते हैं और उन्हें एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

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वाजपेयी जी के विचारों का प्रभाव

अटल जी के विचारों का भारतीय राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उनके विचारों ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा दी है। उन्होंने भारत को एक विकसित और शांतिपूर्ण देश बनाने के लिए काम किया है। उनके विचार लोगों को प्रेरित करते हैं और उन्हें एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

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2 thought on “अटल बिहारी वाजपेयी: भारत के एक महान राष्ट्रवादी और शांतिप्रिय नेता”

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