लालू प्रसाद यादवलालू प्रसाद यादव

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लालू प्रसाद यादव: बिहार की सियासी जमीन से उठी तूफानी हवा

लालू प्रसाद यादव, वह शख्सियत जिसके नाम का जिक्र ही बिहार की राजनीति के पन्नों को हवा दे देता है। एक ऐसा नेता जिसकी चर्चा में उतने ही किस्से हैं, जितने विवाद। जमीन से जुड़े नेता, जिसने गरीबों की आवाज बुलंद की, फिर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा और आज जेल की चार दीवारी में अपने जीवन का एक अध्याय लिख रहा है। आज हम उन्हीं लालू यादव की कहानी बयानते हैं, उनके उफान, उनके विवाद और बिहार की राजनीति पर उनके अमिट छाप की पड़ताल करते हैं।

लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव

गोपालगंज से शुरू हुआ सफर:

1948 में गोपालगंज के फुलवरिया गांव में जन्मे लालू की कहानी किसी फिल्मी किस्से से कम नहीं। किसान परिवार में पले-बढ़े लालू का झुकाव शुरू से ही समाजसेवा की ओर था। वह लाला जयपाल सिंह यादव से प्रेरित थे, जो उनकी प्रेरणा बने और उन्हें राजनीति का रास्ता दिखाया। लालू ने लॉ की पढ़ाई के लिए पटना पहुंचे, लेकिन वहीं छात्र राजनीति का दंगल छेड़ दिया। अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बनने तक उनका सफर थमा नहीं। 1977 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए लालू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

यादव राजनीति का चेहरा:

1985 में राजीव गांधी के हाथों बिहार का मुख्यमंत्री बनकर लालू ने इतिहास रचा। वह भारत के पहले यादव मुख्यमंत्री थे, जिसने सामाजिक समीकरणों को बदल दिया। लालू का कार्यकाल गरीबों और ग्रामीणों के उत्थान पर केंद्रित रहा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और जातिगत आरक्षण लागू किया। हालांकि, उनके शासन में आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त रही और लालू पर बड़े घोटालों के आरोप भी लगे।

लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव

तेजस्वी का आगाज, राबड़ी का सहारा:

2005 में सत्ता गंवाने के बाद लालू प्रसाद ने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया, केंद्रीय मंत्री बने। 2013 में लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाकर एक और इतिहास रचा। हालांकि, 2015 में हुए चारा घोटाले में सजा के बाद लालू की राजनीतिक यात्रा में बड़ा उतार-चढ़ाव आया। उनके बेटे तेजस्वी यादव अब पार्टी को संभालने का दायित्व निभा रहे हैं, लालू की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं।

विवादों के सायें में सफलता:

लालू प्रसाद यादव एक विवादास्पद शख्सियत हैं, जिनके बारे में राय हमेशा विभाजित रही है। भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी छवि को प्रभावित किया, लेकिन बिहार में उनके वफादार समर्थक उनकी हर गलती को माफ कर देते हैं। उन्होंने जातिगत राजनीति को हवा दी, लेकिन वंचित वर्गों को सशक्त भी बनाया। वह एक मजाकिया वक्ता हैं, उनकी भोजपुरी लहज़ा जनता को जोड़ता है।

बिहार की राजनीति पर छाप:

लालू प्रसाद यादव ने बिहार की राजनीति को बदलकर रख दिया। उन्होंने जातिगत राजनीति को एक नया आयाम दिया और वंचित वर्गों को बुलंद किया। उनकी गरीब-किसान पक्षधर छवि ने उन्हें बड़े जनसमूह का समर्थन दिलाया। हालांकि, लालू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने बिहार के विकास को प्रभावित किया, जिसकी आंच आज भी महसूस की जाती है।

लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी

वर्तमान और भविष्य:

आज लालू प्रसाद यादव बेशक सियासी पटल से दूर हैं, लेकिन उनकी छाया अभी भी बिहार की राजनीति पर बनी हुई है। उनके उत्तराधिकारी के तौर पर उनके बेटे तेजस्वी यादव पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और मजबूत राजनीतिक शख्सियत के रूप में उभर रहे हैं।

तेजस्वी की चुनौती:

तेजस्वी यादव के सामने अपने पिता की विरासत को संभालते हुए कई चुनौतियां हैं। पार्टी के अंदरूनी कलह से लेकर विपक्ष की लगातार आलोचना तक, तेजस्वी को कई मोर्चों पर लड़ना है। भ्रष्टाचार के आरोपों का दाग पार्टी से अभी धुला नहीं है, जिसे मिटाना तेजस्वी के लिए जरूरी है। वहीं, बिहार के विकास की रफ्तार को बढ़ाना और युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

बिहार का भविष्य:

लालू की तरह ही तेजस्वी यादव भी वंचित वर्गों के पक्षधारी नेता के रूप में उभरे हैं। वह युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं और पार्टी को नया रूप देने की कोशिश में हैं। लेकिन भविष्य में बिहार का क्या स्वरूप होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेजस्वी आरोपों का सामना कैसे करते हैं, विकास को गति कैसे देते हैं और युवाओं को कितना साथ ले पाते हैं।

लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव की कहानी, एक अधूरा अध्याय है। वह एक नेता जिसने सफलता के शिखर भी छुए और विवादों की आंधी में घिरे भी रहे। बिहार की राजनीति में उनकी विरासत को कैसे याद किया जाएगा, यह आने वाले समय में ही तय होगा।

नेट वर्थ और पारिवारिक पृष्ठभूमि:

लालू प्रसाद यादव की संपत्ति के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनके चुनाव आयोग द्वारा जमा कराए गए हलफनामे में उनकी और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की कुल संपत्ति 2019 में लगभग 3.20 करोड़ रुपये बताई गई थी। हालांकि, उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों की वजह से उनकी वास्तविक संपत्ति में बदलाव आया है।

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लालू का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था और उनके पिता श्री राधाकांत शर्मा यादव एक किसान थे। उनकी मां फुलवरिया देवी एक गृहिणी थीं। उनकी पत्नी राबड़ी देवी भी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और उनके दोनों बेटे, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

लालू प्रसाद यादव
राबड़ी देवी व लालू प्रसाद यादव

आखिर में:

लालू प्रसाद यादव एक जटिल शख्सियत हैं। उनकी उपलब्धियां और विवाद दोनों ही बिहार की राजनीति से अविभाज्य हैं। उनकी विरासत पर अभी बहस जारी है, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि उन्होंने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया है।

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